प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की शुरुआत भारत सरकार द्वारा 2000 में की गई थी, जिसका उद्देश्य देश के ग्रामीण इलाकों को ऑल वेदर सड़कों से जोड़ना है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में इस योजना की आवश्यकता और भी अधिक है, क्योंकि यहां की भौगोलिक स्थिति सड़क निर्माण को चुनौतीपूर्ण बनाती है।
ग्रामीण इलाकों में सड़कें केवल यातायात का साधन नहीं होतीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, और आर्थिक विकास की रीढ़ भी होती हैं। यही कारण है कि उत्तराखंड सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने इस योजना के माध्यम से दूरस्थ गाँवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने का अभियान तेज़ किया है। बीते वर्षों में इस योजना के तहत कई गाँवों तक सड़क पहुँच चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन और आजीविका में बेहतर सुविधा मिली है।
उत्तराखंड की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अब भी ऐसे इलाकों में निवास करता है जहाँ तक सड़कें या तो नहीं पहुँची हैं या फिर मौजूदा मार्ग जर्जर स्थिति में हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना राज्य के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
₹293.75 करोड़ की ताज़ा किस्त: क्या है इसका मतलब?
वित्तीय वर्ष 2024-25 में उत्तराखंड को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत केंद्र सरकार से चौथी किश्त के रूप में 293.75 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है। यह राशि राज्य में ग्रामीण सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए दी गई है। योजना का क्रियान्वयन ग्रामीण निर्माण विभाग के माध्यम से किया जाएगा।
इस राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से उन सड़कों के निर्माण में होगा जो अभी तक योजना के दायरे में नहीं आ पाई हैं या जिनकी हालत बेहद खराब है। उत्तराखंड सरकार की प्राथमिकता ऐसे गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने की है जो अब तक सड़क सुविधा से वंचित रहे हैं।
देशभर में नई सड़क परियोजनाएं जैसे पुणे हाईवे प्रोजेक्ट भी इसी उद्देश्य को आगे बढ़ा रही हैं, जिससे बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को बल मिल रहा है।
चौथी किश्त जारी होने का मतलब यह है कि योजना के कार्यान्वयन की गति को और तेज़ किया जाएगा। इससे उन परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी, जो पहले से स्वीकृत हैं लेकिन धन की कमी के कारण अटकी हुई थीं। इसके अलावा, नए प्रोजेक्ट्स को भी योजना में शामिल किया जा सकेगा।
यह फंड सीधे केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को ट्रांसफर किया गया है, जिससे योजना की पारदर्शिता और ज़वाबदेही बनी रहे। सरकार की योजना है कि 2024-25 में इस फंड से अधिक से अधिक गांवों को जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को सशक्त किया जाए।
कुल अनुदान कितना मिला अब तक? – अब तक ₹865.49 करोड़ जारी
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत उत्तराखंड को अब तक कुल ₹865.49 करोड़ की राशि प्राप्त हो चुकी है। यह आंकड़ा योजना की सफलता और उसके विस्तार का संकेत देता है। वर्तमान में जारी हुई ₹293.75 करोड़ की राशि इस कुल अनुदान की चौथी किश्त है।
इससे पहले की तीन किश्तों के माध्यम से कई जिलों में सड़क निर्माण और पुलों का काम सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इन किश्तों की सहायता से सैकड़ों किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं, जिससे राज्य के सुदूर इलाकों में रह रहे नागरिकों को लाभ पहुंचा है।
इन फंड्स के ज़रिए सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर उन क्षेत्रों को जोड़ा, जहाँ सड़क की सख्त ज़रूरत थी। इससे ग्रामीण क्षेत्र न केवल मुख्य शहरों से जुड़े बल्कि पर्यटन, कृषि और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार देखने को मिला।
सरकार की योजना है कि आगामी वर्षों में इसी प्रकार नियमित फंडिंग से राज्य के सभी गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाए। चौथी किश्त मिलने के बाद अब राज्य सरकार अधिक सक्रियता से कार्यों की समीक्षा और निगरानी करेगी।
वर्ष 2023-24 में कितने प्रोजेक्ट पूरे हुए?
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत उत्तराखंड में वर्ष 2023-24 में ग्रामीण संपर्क को लेकर काफी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इस वित्तीय वर्ष में कुल 814 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण किया गया। यह काम राज्य के विभिन्न पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों में किया गया, जहाँ अब तक स्थायी सड़क संपर्क नहीं था।
इन सड़कों के बनने से ग्रामीण जनता को न केवल आवागमन में सहूलियत मिली है, बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक भी उनकी पहुँच बेहतर हुई है। इसके अलावा, किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुँचाने में आसानी हुई, जिससे उनकी आय में भी सुधार हुआ।
सड़कों के साथ-साथ 9 नए पुलों की भी स्वीकृति दी गई, जो खासकर उन क्षेत्रों में बनाए गए हैं जहाँ बरसात के मौसम में आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाती थी। इन पुलों के बनने से साल भर गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से बना रहेगा।
इन परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने कार्यदायी एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए। जिला स्तर पर अधिकारियों को प्रतिदिन की प्रगति की रिपोर्टिंग करनी होती है, जिससे निर्माण कार्यों की निगरानी लगातार बनी रहती है।
अन्य राज्यों में भी पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे जैसी पहलें तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क को मज़बूत बना रही हैं।
PMGSY-IV की तैयारी: 8,500 किमी सड़कों का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण (PMGSY-IV) की तैयारी उत्तराखंड में तेजी से चल रही है। राज्य सरकार की योजना है कि इस चरण में लगभग 8,500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाए। इसके लिए विभाग द्वारा विभिन्न जिलों में सर्वेक्षण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।
इस चरण में 1,490 नई बस्तियों को जोड़ने का प्रस्ताव है, जिन्हें अब तक योजना के तहत शामिल नहीं किया गया था। इन बस्तियों तक सड़क पहुँचाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि वहाँ के लोग आज भी कच्चे रास्तों से आवाजाही करने को मजबूर हैं।
उत्तराखंड सरकार पहले चरण में करीब 3,000 किलोमीटर सड़कों की डीपीआर को अंतिम रूप दे चुकी है, जिसे जल्द ही केंद्र सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। इन परियोजनाओं में प्राथमिकता उन क्षेत्रों को दी जाएगी जहाँ सड़क संपर्क बिल्कुल नहीं है या मौजूदा सड़कें बेहद खराब हालत में हैं।
PMGSY-IV के तहत निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी संसाधनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन सर्वे, जीआईएस मैपिंग और मोबाइल आधारित मॉनिटरिंग जैसे उपायों से निर्माण प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आगामी 2 वर्षों में इन नई सड़कों का निर्माण शुरू कर दिया जाए, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण बस्तियाँ मुख्य मार्गों से जुड़ सकें और राज्य की आर्थिकी को गति मिल सके।
स्थानीय समुदायों पर असर: जीवन में क्या बदलाव आए?
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों का स्थानीय समुदायों पर सीधा और सकारात्मक असर पड़ा है। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहाँ गाँव अक्सर पहाड़ों और खाईयों के बीच बसे होते हैं, सड़क का मतलब है जीवन में एक नया मोड़।
सड़क बनने के बाद ग्रामीणों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कई बदलाव देखने को मिले हैं:
स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुँच आसान हुई – अब मरीजों को अस्पताल पहुँचाने के लिए घंटों का पैदल सफर नहीं करना पड़ता।
शिक्षा में सुधार – कई बच्चे अब नज़दीकी कस्बों के स्कूलों और कॉलेजों तक नियमित रूप से जा पा रहे हैं।
कृषि और व्यापार को फायदा – किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुँचाने में कम समय लगता है, जिससे वे बेहतर कीमत पा रहे हैं।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ी – महिलाओं की स्कूल, अस्पताल और स्व-सहायता समूहों तक पहुँच बढ़ी है, जिससे उनका सामाजिक दायरा विस्तृत हुआ है।
सड़कें बनने के बाद कई गांवों में छोटे स्तर पर दुकानें, परिवहन सेवाएं और पर्यटन गतिविधियाँ शुरू हुई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोज़गार के नए अवसर भी मिल रहे हैं। इसके अलावा, डिज़ास्टर मैनेजमेंट और रेस्क्यू ऑपरेशन्स में भी तेजी आई है क्योंकि अब बचाव दलों की पहुँच अधिक आसान हो गई है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत उत्तराखंड को ₹293.75 करोड़ का जो अनुदान प्राप्त हुआ है, वह केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि एक अवसर है – राज्य के दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने का। वर्ष 2023-24 में सैकड़ों किलोमीटर नई सड़कों और पुलों के निर्माण ने इस दिशा में ठोस नींव रखी है।
स्थानीय समुदायों के जीवन में जो बदलाव आ रहे हैं – चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य, आजीविका या आपातकालीन सेवाओं तक पहुँच – ये सब इस योजना की उपयोगिता को साबित करते हैं। हालांकि चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन सरकार के द्वारा अपनाए गए तकनीकी और नीतिगत समाधान दिखाते हैं कि इनका सामना गंभीरता से किया जा रहा है।
PMGSY-IV की तैयारी और 8,500 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में और भी अधिक गांव स्थायी सड़क संपर्क से जुड़ेंगे। यह न केवल लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बनाएगा, बल्कि राज्य की आर्थिकी और समग्र विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा।
आप इस योजना से जुड़े हैं? क्या आपके गांव में भी सड़क बनी है या नहीं? नीचे कमेंट में अपना अनुभव ज़रूर साझा करें।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न सरकारी स्रोतों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है। हम किसी भी सरकारी योजना से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े नहीं हैं और न ही किसी प्रकार की आर्थिक सहायता या लाभ प्रदान करते हैं। किसी भी योजना से संबंधित विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक सरकारी स्रोतों से पुष्टि करें।