राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जिसे 2016 में लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य किसानों को देशभर के कृषि बाजारों से जोड़ना और उनकी फसल के लिए बेहतर दाम दिलाना था। अब सरकार ने इस प्लेटफॉर्म को और उन्नत करते हुए e-NAM 2.0 Launch किया है, जिससे किसानों को अधिक पारदर्शिता और व्यापार में आसानी मिलेगी।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने छोटे और सीमांत किसानों को डिजिटल व्यापार से जोड़ने के लिए कई पहल की हैं। इनमें e-NAM 2.0 के जरिए लॉजिस्टिक्स, मूल्य निर्धारण और अंतर-राज्यीय व्यापार को सरल बनाना शामिल है। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और बिचौलियों की भूमिका को कम करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।
e-NAM 2.0 क्या है और इसकी विशेषताएँ
सरकार ने मौजूदा e-NAM प्लेटफॉर्म को upgrade कर एक नया संस्करण पेश किया है, जिसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसका लक्ष्य कृषि व्यापार को अधिक सुगम, पारदर्शी और डिजिटल रूप से सक्षम बनाना है।
नई विशेषताएँ:
- डिजिटल भुगतान और बैंक खाता लिंकिंग: किसान अब सीधे अपने बैंक खाते से भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।
- e-KYC और आधार सत्यापन: किसानों और व्यापारियों के लिए अधिक सुरक्षित लेनदेन सुनिश्चित करने के लिए यह सुविधा जोड़ी गई है।
- लॉजिस्टिक्स सेवाओं का समावेश: अब किसान अपनी फसल को बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधा के जरिए दूरस्थ मंडियों में भी बेच सकते हैं।
- ऑनलाइन नीलामी में सुधार: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बोली लगाने की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया गया है।
- अंतर-राज्यीय व्यापार को बढ़ावा: राज्य सरकारों के सहयोग से व्यापार लाइसेंस को मान्यता देने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
किसानों के लिए मुख्य लाभ
e-NAM 2.0 छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है। इसका उद्देश्य उन्हें बेहतर बाजार तक पहुंच प्रदान करना और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है।
छोटे किसानों को अधिक अवसर:
कई छोटे किसान कम मात्रा में उपज बेचते हैं, जिससे उन्हें बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। e-NAM 2.0 के तहत किसान उत्पादक संगठन (FPO) किसानों की उपज को इकट्ठा करके बड़े पैमाने पर बिक्री की सुविधा प्रदान करेंगे, जिससे उन्हें अधिक लाभ होगा।
EPS-95 पेंशन योजना के तहत सरकार छोटे और सीमांत किसानों समेत सभी श्रमिकों को न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित कर रही है, जिससे उन्हें वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा मिले। इसी तरह, e-NAM 2.0 किसानों को अधिक व्यापारिक अवसर देकर उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारने का प्रयास कर रहा है।
अंतर-राज्यीय और अंतर-मंडी व्यापार:
पहले किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए स्थानीय मंडियों तक ही सीमित रहना पड़ता था। अब, नए अपडेट के तहत किसान किसी भी राज्य की मंडी में अपनी फसल ऑनलाइन बेच सकते हैं, जिससे उन्हें अधिक खरीदार मिल सकेंगे और उनकी फसल का मूल्य बढ़ सकेगा।
लॉजिस्टिक्स सुधार:
अब किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए मंडी तक जाने की जरूरत नहीं होगी। वे सीधे खेत से ही ऑनलाइन नीलामी में भाग ले सकते हैं और बेहतर लॉजिस्टिक्स सेवा का लाभ उठा सकते हैं। इससे समय और परिवहन लागत की बचत होगी।
डिजिटल भुगतान और पारदर्शिता:
e-NAM 2.0 में बैंक खातों को सीधे जोड़ा गया है, जिससे किसानों को नकद भुगतान की समस्या से छुटकारा मिलेगा। साथ ही, ऑनलाइन भुगतान होने से धोखाधड़ी की संभावना भी कम होगी।
सरकार का दृष्टिकोण और आधिकारिक घोषणाएँ

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने e-NAM 2.0 के जरिए किसानों की समस्याओं को हल करने और उनके लिए व्यापार को अधिक सुगम बनाने के उद्देश्य से कई कदम उठाए हैं। यह नया संस्करण किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने में मदद करेगा और व्यापार की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाएगा।
सरकारी पहल और घोषणाएँ:
- कृषि मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में बताया कि अब तक 4392 किसान उत्पादक संगठन (FPO) को e-NAM प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है, जिससे छोटे किसानों को भी संगठित होकर बेहतर कीमत प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।
PIB के अनुसार, सरकार ने e-NAM 2.0 में अंतर-राज्यीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अन्य राज्यों के व्यापार लाइसेंस को मान्यता देने की दिशा में काम किया है।
- डिजिटल और लॉजिस्टिक्स सुधारों पर जोर देते हुए सरकार ने ऑनलाइन नीलामी के लिए 231 कृषि उत्पादों के मानक तय किए हैं, जिससे व्यापार में एकरूपता बनी रहेगी।
- किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए मंडी जाने की बाध्यता को समाप्त करने के लिए फार्म गेट मॉड्यूल जोड़ा गया है, जिससे वे अपने खेत से ही ऑनलाइन व्यापार कर सकते हैं।
सरकार का उद्देश्य e-NAM 2.0 के जरिए किसानों को बिचौलियों की भूमिका से मुक्त करना और उन्हें डिजिटल बाजार की शक्ति से जोड़ना है।
केंद्र सरकार PM विकास योजना के तहत कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देकर छोटे उद्यमियों और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में e-NAM 2.0 भी एक डिजिटल मंच के रूप में किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
e-NAM 2.0 का लॉजिस्टिक्स और तकनीकी सुधार
e-NAM 2.0 को केवल एक व्यापारिक प्लेटफॉर्म तक सीमित न रखते हुए इसे एक संपूर्ण डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत कई नई तकनीकी सुविधाएँ जोड़ी गई हैं, जो न केवल व्यापार को सुगम बनाएंगी बल्कि किसानों के लिए लागत भी कम करेंगी।
मुख्य सुधार:
- लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं का एकीकरण: किसानों को अब अपनी फसल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में बेहतर सुविधा मिलेगी, जिससे समय और लागत की बचत होगी।
- डिजिटल भुगतान और e-KYC: बैंक खातों से सीधे भुगतान होने से किसानों को नकद लेनदेन से होने वाली समस्याओं से राहत मिलेगी। साथ ही, आधार आधारित e-KYC से व्यापारिक धोखाधड़ी को रोका जा सकेगा।
- बेहतर मूल्य निर्धारण प्रणाली: ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया गया है, जिससे किसानों को उनकी फसल का वास्तविक बाजार मूल्य मिल सके।
- उपयोगकर्ता-अनुकूल प्लेटफॉर्म: मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल को पहले की तुलना में अधिक आसान बनाया गया है, जिससे किसान आसानी से व्यापार कर सकें।
e-NAM 2.0 का यह उन्नत स्वरूप न केवल कृषि व्यापार को अधिक प्रभावी बना रहा है, बल्कि किसानों को डिजिटल बाजार में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है।
संभावित चुनौतियाँ और समाधान
e-NAM 2.0 के कई फायदे होने के बावजूद, इसके सफल कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ भी हैं। सरकार और कृषि विशेषज्ञ इन समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न उपाय कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक किसान इस प्लेटफॉर्म का लाभ उठा सकें।
1. किसानों की डिजिटल साक्षरता की कमी
कई छोटे और सीमांत किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने में सहज नहीं होते। उन्हें ऑनलाइन पंजीकरण, नीलामी प्रक्रिया और डिजिटल भुगतान समझने में कठिनाई होती है।
समाधान:
- सरकार प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है, जहाँ किसानों को e-NAM 2.0 के उपयोग की जानकारी दी जाती है।
- मंडियों में ई-नाम सहायता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहाँ किसान अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
- मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अधिक किसान इसे आसानी से समझ सकें।
2. इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या
ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की समस्या किसानों के लिए एक बड़ी बाधा है। ऑनलाइन व्यापार और डिजिटल भुगतान निर्बाध कनेक्टिविटी पर निर्भर करते हैं।
समाधान:
- सरकार डिजिटल इंडिया मिशन के तहत ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बढ़ाने पर काम कर रही है।
- ऑफलाइन पंजीकरण और SMS आधारित सूचना प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि इंटरनेट की समस्या होने पर भी किसान अपडेट प्राप्त कर सकें।
- कुछ राज्यों में मंडी नेटवर्क के साथ सामुदायिक इंटरनेट केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहाँ किसान e-NAM प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।
3. राज्य सरकारों की भागीदारी में कमी
e-NAM को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए राज्य सरकारों का सहयोग जरूरी है। हालांकि, कई राज्य अभी तक अपने कृषि विपणन कानूनों में आवश्यक संशोधन नहीं कर पाए हैं, जिससे e-NAM का लाभ सीमित रह जाता है।
समाधान:
- केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ नीतिगत समन्वय बढ़ा रही है ताकि e-NAM को सभी राज्यों में सफलतापूर्वक लागू किया जा सके।
- अंतर-राज्यीय व्यापार को आसान बनाने के लिए एकीकृत व्यापार लाइसेंस की प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है।
- राज्य सरकारों को आर्थिक और तकनीकी सहायता दी जा रही है ताकि वे अपनी मंडियों को e-NAM से जोड़ सकें।
4. किसानों को तत्काल भुगतान की चिंता
कई किसान तुरंत भुगतान प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं, जबकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भुगतान में कभी-कभी देरी हो सकती है।
समाधान:
- फास्ट ट्रैक पेमेंट गेटवे के जरिए भुगतान प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है।
- बैंकों और e-NAM के बीच सीधे समन्वय से किसानों को जल्द भुगतान सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है।
- मोबाइल वॉलेट और यूपीआई भुगतान जैसी सुविधाओं को e-NAM 2.0 में जोड़ा गया है।
5. मंडियों और बिचौलियों का विरोध
कुछ स्थानीय मंडियां और बिचौलिये इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इससे किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़कर उनकी भूमिका को कम किया जा रहा है।
समाधान:
- किसानों और व्यापारियों को एक मंच पर लाने के लिए संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
- स्थानीय व्यापारियों को e-NAM में भाग लेने के लिए प्रोत्साहन योजनाएँ दी जा रही हैं।
- e-NAM से जुड़े व्यापारियों को कर लाभ और विशेष सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं ताकि वे इसे अपनाने के लिए प्रेरित हों।
निष्कर्ष
e-NAM 2.0 डिजिटल क्रांति की ओर एक बड़ा कदम है, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कुछ चुनौतियों का समाधान आवश्यक है। सरकार किसानों को डिजिटल व्यापार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। यदि ये सुधार सफल होते हैं, तो आने वाले वर्षों में यह प्लेटफॉर्म किसानों के लिए एक मजबूत और पारदर्शी कृषि बाजार के रूप में स्थापित हो सकता है।